Section 74(5) के तहत Voluntary Payment या Coercion? Karnataka HC के ऐतिहासिक निर्णय पर श्री कृष्ण एवं अर्जुन का संवाद

M/s Kesar Color Chem Industries पर DGGI ने Raj Chemicals के साथ Fake Invoice लेन-देन का आरोप लगाया। विभाग ने दावा किया कि Raj Chemicals ने बिना वास्तविक सप्लाई के फर्जी इनवॉइस जारी किए और Kesar Color Chem Industries ने ₹4.88 करोड़ का गलत ITC लिया।

29 जुलाई 2021 को DGGI अधिकारियों ने Mumbai में कंपनी के ऑफिस पर छापा मारा, 48 घंटे तक मालिक को हिरासत में रखा, उनके Mobile और Computer जब्त किए, और ₹2.5 करोड़ की वसूली की—₹1 करोड़ 31 जुलाई 2021 को और ₹1.5 करोड़ 3 अगस्त 2021 को, बिना किसी Show Cause Notice (SCN) के।

कंपनी ने इसे Karnataka High Court में चुनौती दी। एकल न्यायाधीश ने राशि की वापसी का आदेश दिया, जिसे DGGI ने अपील में चुनौती दी।

अर्जुन: Prabhu! DGGI ने बिना Show Cause Notice के Kesar Color Chem Industries से ₹2.5 करोड़ वसूल लिए। क्या यह न्यायसंगत है?

श्रीकृष्ण: पार्थ! यह Tax Department का शक्ति का दुरुपयोग है। Section 74(5) के तहत कोई भी Payment तभी वैध होता है जब वह Voluntarily किया गया हो। लेकिन यहाँ, कंपनी के मालिक को हिरासत में रखकर, धमकाकर और गिरफ्तारी की चेतावनी देकर जबरन Payment लिया गया। यह Article 265 of Constitution का उल्लंघन है, जो कहता है कि कोई भी Tax Without Authority of Law वसूला नहीं जा सकता।

अर्जुन:  लेकिन DGGI का दावा है कि Payment Voluntary था?

श्रीकृष्ण: नहीं, पार्थ! कोर्ट ने पाया कि: अधिकारियों ने मालिक को 48 घंटे तक बंधक बनाकर रखा।

— Mobile जब्त कर लिए ताकि वे वकील से संपर्क न कर सकें।

— आधी रात को जबरन बयान (Statement) लिखवाया गया और हस्ताक्षर कराए गए।

–DGGI ने धमकी दी कि यदि पैसा नहीं दिया तो गिरफ्तारी होगी।

यह स्पष्ट है कि Payment दबाव में किया गया, न कि स्वेच्छा से।

अर्जुन: : क्या GST कानून अधिकारियों को इस तरह जबरन वसूली की अनुमति देता है?

श्रीकृष्ण: नहीं, पार्थ! CBIC के नियम और Delhi High Court के Lovelesh Singhal केस में यह स्पष्ट किया गया है कि:

  1. कोई भी Tax वसूली बिना SCN के नहीं की जा सकती।
  2. Section 74(5) केवल करदाता को स्वेच्छा से Payment करने की अनुमति देता है, जब वह खुद स्वीकार करे कि उसने Tax गलत लिया।
  3. DGGI को पहले Show Cause Notice जारी करना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

अर्जुन:  तो क्या Karnataka High Court ने इस जबरन वसूली को अवैध घोषित कर दिया?

श्रीकृष्ण: बिल्कुल, पार्थ! कोर्ट ने कहा कि:

–₹2.5 करोड़ की वसूली पूरी तरह अवैध थी।

–GST अधिकारियों के पास Show Cause Notice से पहले जबरन वसूली का कोई अधिकार नहीं।

–DGGI को यह पैसा ब्याज सहित वापस करना होगा।

अर्जुन: प्रभु, इस फैसले से करदाताओं को क्या सीखने को मिलता है?

श्रीकृष्ण: सुनो पार्थ! यह निर्णय करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण सीख देता है 

  1. GST अधिकारी जबरदस्ती पैसे वसूल नहीं सकते।
  2. यदि कोई करदाता दबाव में Payment करता है, तो वह कोर्ट में इसे Challenge कर सकता है।
  3. Show Cause Notice के बिना कोई भी Tax वसूली अवैध मानी जाएगी।
  4. CBIC के निर्देशों के अनुसार, किसी भी वसूली से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।

अर्जुन: तो क्या करदाताओं को ऐसे मामलों में क्या कानूनी कदम उठाना चाहिए?

श्रीकृष्ण: पार्थ! अगर कोई करदाता दबाव में Payment करता है, तो उसे :

— तुरंत किसी Tax Expert या Lawyer से सलाह लेनी चाहिए।

— कोर्ट में “Retraction Affidavit” दायर करके जबरन वसूली को चुनौती देनी चाहिए।

— CBIC और High Court के फैसलों का हवाला देकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

अर्जुन:  प्रभु, आपने स्पष्ट कर दिया कि न्याय केवल कानून का पालन करने में नहीं, बल्कि अधिकारों की रक्षा में भी है।

श्रीकृष्ण: सही कहा, पार्थ! ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है, और न्याय की जीत तभी होती है जब करदाता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सतर्क रहते हैं। यह निर्णय करदाताओं के लिए एक मार्गदर्शक है कि वे अन्याय के खिलाफ खड़े हों और कानून का सही उपयोग करें।

Final Judgment:

Karnataka High Court ने DGGI की अपील खारिज कर दी और ₹2.5 करोड़ की जबरन वसूली को अवैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि GST अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए और दबाव डालकर Tax वसूलने की अनुमति नहीं दी जा सकती!

Disclaimer:

यह लेख श्रीकृष्ण की कृपा से कृष्ण-अर्जुन संवाद के रूप में केवल Legal Concepts को सरल शब्दों एवं रोचक तरीके से समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका कोई अन्य प्रयोजन नहीं है। इसमें किसी प्रकार की धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक या कानूनी व्याख्या का दावा नहीं किया जाता और न ही किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई उद्देश्य है। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि इसे केवल शैक्षिक और जानकारीपूर्ण सामग्री के रूप में ही ग्रहण करें। यदि किसी विधिक समस्या से जुड़े निर्णय की आवश्यकता हो, तो किसी योग्य Subject Matter Expert, CA / Advocate से परामर्श अवश्य करें।

श्रीकृष्ण की कृपा से ज्ञान की ज्योति सभी तक पहुँचे।

This article is written by Himanshu Singh who is a Chartered Accountant, master’s in law and Visiting Faculty of Central GST and UPGST Department Officers Training Institutes in Uttar Pradesh. He can be reached through email mr.himanshu@icai.org

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